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सरकार ग्रामीण आबादी की जीवन सुगमता में सुधार के लिए प्रतिबद्ध; ग्रामीण गरीबी के मुद्दे को हल करने के लिए दृढ़ ग्रामीण विकास के लिए 2019-20 की तुलना में केन्द्रीय बजट 2020-21 में अधिक प्रावधान

ग्रामीण विकास मंत्रालय

सरकार ग्रामीण आबादी की जीवन सुगमता में सुधार के लिए प्रतिबद्ध; ग्रामीण गरीबी के मुद्दे को हल करने के लिए दृढ़

ग्रामीण विकास के लिए 2019-20 की तुलना में केन्द्रीय बजट 2020-21 में अधिक प्रावधान

प्रविष्टि तिथि: 01 FEB 2020 4:02PM by PIB Delhi
 

केन्द्रीय बजट 2020-21 में ग्रामीण विकास विभाग के लिए 1,20,147.91 करोड़ रुपये के प्रावधान का प्रस्ताव किया गया है, जो 2019-20 की तुलना में अधिक है। 2019-20 में 1,17,647.19 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। ग्रामीण विकास विभाग राज्यों के सहयोग से कई अत्यंत महत्वपूर्ण केन्द्र प्रायोजित योजनाएं चलाता है। ये योजनाएं ग्रामीण रोजगार, ग्रामीण आवास, ग्रामीण सड़क, सामाजिक सहायता और ग्रामीण महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन देने से संबंधित हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दीनदयाल उपाध्याय-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अधिक आवंटन किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार ग्रामीण आबादी के लिए जीवन सुगमता में और सुधार करने के प्रति दृढ़ है। सरकार ग्रामीण गरीबी के मुद्दे को भी हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और सतत परिलब्धियों के सृजन के लिए विशेष जोर दिया गया है। जल संरक्षण, ग्रामीण हाटों का निर्माण, गांव में सड़कों और नालियों तथा आजीविका में विविधता पैदा करने के लिए व्यक्तिगत लाभार्थी योजनाओं पर भी बल दिया गया है। राष्ट्रीय संसाधन प्रबंधन गतिविधियों पर ध्यान दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इसके तहत वित्त वर्ष 2014-15 में 54 प्रतिशत खर्च किया गया था। 2019-20 के दौरान यह खर्च बढ़कर 68 प्रतिशत से अधिक हो गया।

वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 70 लाख मकानों के निर्माण का प्रस्ताव कायम रखा गया है। सरकार ने ग्रामीण सड़कों को चौड़ा करने और ग्रामीण कृषि बाजारों, स्कूलों और अस्पतालों से सड़कों को जोड़ने के लिए हाल में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना-3 की शुरूआत की है। उल्लेखनीय है कि इस समय 58 लाख स्व-सहायता समूह मौजूद हैं, जिन्हें 2023-24 तक 78 लाख तक पहुंचाया जाएगा। इनमें से 8,10,000 स्व-सहायता समूहों का गठन मौजूदा वित्त वर्ष में किया जा चुका है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आर्थिक परिवर्तन परियोजना शुरू की गई है, ताकि दीनदयाल उपाध्याय-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 13 अत्यंत गरीब राज्यों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाई जा सके।

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आर.के.मीणा/आरएनएम/एकेपी/एमएस-5576     



(रिलीज़ आईडी: 1601723) आगंतुक पटल : 29



 
 
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